Homeसाइंससूर्य ग्रहण कब और कैसे होता है? जानिए पूरी जानकारी

सूर्य ग्रहण कब और कैसे होता है? जानिए पूरी जानकारी

सूर्य ग्रहण का लगना प्रकृति की एक खास घटना है, जो सदियों से घटती आ रही है. लेकिन लोगों के मन में सूर्य ग्रहण कब और कैसे होता है जैसे सवाल हमेशा बने रहते हैं. यदि आपके भी मन में इस तरह के सवाल हैं, तो यह लेख आपके लिए काफी खास होने वाला है. क्योंकि आज के इस लेख में हम आपको सूर्य ग्रहण (Solar Eclipse in Hindi) के बारे में विस्तार से जानकारी देंगे.

इस लेख में आपको ग्रहण किसे कहते है, सूर्य ग्रहण क्यों होता है, सूर्य ग्रहण कब लगता है और सूर्य ग्रहण के प्रकार जैसे सवालों के जवाब दिए जाएंगे. सूर्य ग्रहण तब होता है जब चंद्रमा, पृथ्वी और सूर्य के बीच में आ जाता है. इस स्थिति में हमें पूरा सूर्य या सूर्य का कुछ भाग काला नजर आता है. ऐसा क्यों होता है? आइए जानते हैं पूरी जानकारी.

सूर्य ग्रहण क्या है और क्यों होता है? (Solar Eclipse in Hindi)

solar eclipse diagram hindi
सूर्य ग्रहण आरेख

जैसा कि हम जानते हैं, पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा करती है और चंद्रमा पृथ्वी की. सूर्य ग्रहण तब होता है जब चंद्रमा, सूर्य और पृथ्वी के बीच से गुजरता है. इस दौरान जब पृथ्वी, चंद्रमा और सूर्य तीनों एक ही रेखा में संरेखित होते हैं तो पृथ्वी से देखने पर सूर्य का कुछ हिस्सा या पूरा सूर्य ढका हुआ दिखाई देता है, जिसे हम सूर्य ग्रहण कहते हैं. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि चंद्रमा सूर्य के बिल्कुल सामने होता है और इसकी छाया पृथ्वी के कुछ हिस्से पर सूर्य की रोशनी को आने से रोक देती है.

सूर्य ग्रहण कैसे होता है?

सूर्य ग्रहण हमेशा नए चाँद यानी अमावस्या के साथ होता है. ऐसा इसलिए क्योंकि इस दौरान चंद्रमा पृथ्वी के कक्षीय तल के नजदीक होता है. लेकिन यह घटना हर अमावस्या के दिन नहीं घटती. ऐसा क्यों? आइए समझते हैं.

surya grahan solar eclipse hindi
सूर्य ग्रहण कैसे होता है?

यदि चंद्रमा पूरी तरह से गोलाकार कक्षा में होता और उसी कक्षीय तल में होता जिसमें पृथ्वी है, तो प्रत्येक अमावस्या को सूर्य ग्रहण होता. बजाय इसके, क्योंकि चंद्रमा की कक्षा पृथ्वी की कक्षा से लगभग 5 डिग्री झुकी हुई है, इसकी छाया आमतौर पर पृथ्वी से चूक जाती है.

इसलिए सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण केवल ग्रहण काल (35 दिन का वह समय जब चंद्रमा पृथ्वी की कक्षा तल के नजदीक होता है) के दौरान होते हैं, परिणामस्वरूप कम-से-कम दो और अधिकतम 5 सूर्य ग्रहण प्रति वर्ष लग सकते हैं, जिनमें दो से ज्यादा पूर्ण सूर्य ग्रहण (total solar eclipse) नहीं होते.

पूर्ण सूर्य ग्रहण बहुत कम लगते हैं, क्योंकि उनके लिए सूर्य और चंद्रमा के केंद्र के बीच अधिक सटीक संरेखण (alignment) की आवश्यकता होती है और आकाश में चंद्रमा का दृश्यमान आकार सूर्य को पूरी तरह से कवर करने के लिए काफी छोटा होता है. पूर्ण सूर्य ग्रहण औसतन 360 से 410 सालों में पृथ्वी के किसी दिए गए स्थान से देखने को मिलते हैं.

सूर्य ग्रहण के प्रकार

सूर्य ग्रहण चार प्रकार के होते हैं:

  1. पूर्ण सूर्य ग्रहण
  2. आंशिक सूर्य ग्रहण
  3. वलयाकार सूर्य ग्रहण 
  4. संकर (हाइब्रिड) सूर्य ग्रहण

पूर्ण सूर्य ग्रहण – यह तब होता है जब चंद्रमा की गहरी छाया सूर्य के प्रकाश को पूरी तरह से रोक लेती है, इस दौरान केवल सूर्य के वातावरण की बाहरी परत (solar corona) ही दिखाई देती है. पूर्ण सूर्य ग्रहण उन्हें ही दिखाई देता है जो चंद्रमा की पूरी छाया (अम्ब्रा) के मार्ग में मौजूद होते हैं. इस मार्ग के बाहर केवल आंशिक सूर्य ग्रहण दिखाई देता है.

आंशिक सूर्य ग्रहण – यह ग्रहण तब होता है जब सूर्य और चंद्रमा सटीक रूप से पृथ्वी के साथ एक लाइन में नहीं होते, इस दौरान सूर्य का केवल कुछ हिस्सा ही ढका हुआ दिखाई देता है. यह घटना आमतौर पर धरती के बड़े हिस्से से देखी जा सकती है जहां चंद्रमा की पूरी छाया नहीं गिरती या जो हिस्सा अम्ब्रा से बाहर होता है. हालांकि, कुछ ग्रहण केवल आंशिक ग्रहण के तौर पर ही दिखाई देते हैं, क्योंकि गहरी छाया अम्ब्रा पृथ्वी के ध्रुवीय क्षेत्र से बाहर गिरती है.

वलयाकार सूर्य ग्रहण  – वलयाकार सूर्य ग्रहण तब होता है जब चंद्रमा, सूर्य और पृथ्वी के बीच से गुजरता है, लेकिन इस दौरान चंद्रमा पृथ्वी से अपने सबसे दूर बिंदु पर या बिंदु के नजदीक होता है. क्योंकि चंद्रमा पृथ्वी से दूर होता है, इसलिए यह सूर्य की तुलना में छोटा नजर आता है और सूर्य को पूरी तरह से कवर नहीं कर पाता. परिणामस्वरुप, चंद्रमा, एक बड़े और चमकदार डिस्क (सूर्य) पर, एक छोटे डिस्क की तरह नजर आता है और चंद्रमा के चारों तरफ एक छले (रिंग) की तरह दिखाई देता है.

संकर (हाइब्रिड) सूर्य ग्रहण – धरती की सतह curved होने की वजह से, कभी-कभी पूर्ण सूर्य ग्रहण और वलयाकार सूर्य ग्रहण के बीच बदलाव हो सकता है. पृथ्वी की सतह पर कुछ जगह पर यह पूर्ण ग्रहण के रूप में दिखाई देता है तो कहीं पर वलयाकार ग्रहण के रूप में दिखाई देता है. लेकिन, इस तरह के ग्रहण बहुत ही कम देखने को मिलते हैं.

अम्ब्रा और पेनम्ब्रा छाया

Umbra – चंद्रमा की छाया का वह केंद्रीय क्षेत्र जिससे देखने पर पूरा सूर्य ढका हुआ दिखाई देता है.

Penumbra – चंद्रमा की छाया का वह बाहरी हिस्सा जो सूर्य की किरणों के केवल कुछ हिस्से को ही रोकता है.

सूर्य ग्रहण को सीधे तौर पर क्यों नहीं देखना चाहिए?

वैज्ञानिकों के अनुसार सूर्य ग्रहण को नंगी आँखों से बिल्कुल भी नहीं देखना चाहिए. यदि कोई ऐसा करता है तो उसे एक्लिप्स ब्लाइंडनेस या रेटिनल बर्न जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है. सूर्य ग्रहण के दौरान सूर्य की किरणें और अधिक घातक हो जाती हैं. ये किरणें आँखों के रेटिना को खराब करने की क्षमता रखती हैं, जो सीधा आपके दिमाग से जुड़ता है. 

आँखों में होने वाली इस दिक्कत का तुरंत पता नहीं चलता. इसका पता कुछ घंटों या दिनों बाद चलता है. इससे आपके आँखों की रोशनी हमेशा के लिए जा सकती है. इसलिए सूर्य ग्रहण को देखने के लिए एक्लिप्स ग्लास का इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है.

सूर्य ग्रहण कितने समय तक रहता है?

सूर्य ग्रहण कुछ घंटो तक चल सकता है, लेकिन पूर्ण सूर्य ग्रहण (total solar eclipse) केवल 7 मिनट और 32 सेकंड के लिए होता है.

निष्कर्ष (Conclusion):

उम्मीद करता हूँ आपको अच्छे से समझ आ गया होगा कि सूर्य ग्रहण कब और कैसे होता है. मैंने अपनी तरफ से पूरी कोशिश की है सूर्य ग्रहण (Solar Eclipse in Hindi) से संबंधित सभी जानकारियां आप तक पहुंचाने की ताकि आपको इस विषय के संदर्भ में किसी दूसरी वेबसाइट पर जाने की जरूरत ना पड़े. अगर आपको यह जानकारी पसंद आई हो या कुछ नया सीखने को मिला हो तो कृपया इसे दूसरे सोशल मीडिया नेटवर्क पर शेयर जरुर करें.

Rahul Chauhan
Rahul Chauhanhttps://hindivibe.com/
Rahul Chauhan, Hindivibe के Author और Founder हैं. ये एक B.Tech डिग्री होल्डर हैं. इन्हें विज्ञान और तकनीक से संबंधित चीजों के बारे में जानना और लोगों के साथ शेयर करना अच्छा लगता है. यह अपने ब्लॉग पर ऐसी जानकारियां शेयर करते हैं, जिनसे कुछ नया सिखने को मिले और लोगों के काम आए.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Latest Articles